Thursday, 6 April 2017

अब अलग सी है ज़िंदगी ...

रास्ते मेरे,
 हैं पड़ाव भी मेरे 
अपनी रफ़्तार ख़ुद चुन के 
बना लिया है इनको अपना 
अब नहीं थकते ये 
नंगे पाँव मेरे ! 
मिल जाती है जब भी चाहूँ 
छांव घनी 
धूप भी सहेज लेती हूँ 
इन आँखों में
सपनो का सा काम करते है 
वो लफ़्ज़ 
जो सुन नहीं पायी 
वो भी 
जो कह नहीं पायी
पर अब कोई उलझन नहीं 
क्यूँकि
अब हैं रास्ते मेरे,
 और ये पड़ाव भी मेरे !