सिखा गए कितना कुछ
जाते हुए लम्हें
बीते हुए दिन
गुज़रते हुए से हफ्ते
सिखा गए कितना कुछ
बदले हुए मौसम
झरते हुए पत्ते
बिखरे हुए से फूल
सिखा गए कितना कुछ
डूबते हुए सूरज
खोते हुए सितारे
बिखरे हुए से बादल
सिखा गए कितना कुछ
सूखते हुए आंसू
सिमटते हुए सपने
मरते हुए से रिश्ते...
सिखा गए मुझे
नहीं थमना, नहीं रुकना
गिरना, पर गिर के उठना
आगे बढ़ना
और जीना..
सिर्फ ज़िंदा नहीं रहना!
जाते हुए लम्हें
बीते हुए दिन
गुज़रते हुए से हफ्ते
सिखा गए कितना कुछ
बदले हुए मौसम
झरते हुए पत्ते
बिखरे हुए से फूल
सिखा गए कितना कुछ
डूबते हुए सूरज
खोते हुए सितारे
बिखरे हुए से बादल
सिखा गए कितना कुछ
सूखते हुए आंसू
सिमटते हुए सपने
मरते हुए से रिश्ते...
सिखा गए मुझे
नहीं थमना, नहीं रुकना
गिरना, पर गिर के उठना
आगे बढ़ना
और जीना..
सिर्फ ज़िंदा नहीं रहना!



