Tuesday, 16 December 2014

सीख..

सिखा गए कितना कुछ
जाते हुए लम्हें
बीते हुए दिन
गुज़रते हुए से हफ्ते

सिखा गए कितना कुछ
बदले हुए मौसम
झरते हुए पत्ते
बिखरे हुए से फूल

सिखा गए कितना कुछ
डूबते हुए सूरज
खोते हुए सितारे
बिखरे हुए से बादल

सिखा गए कितना कुछ
सूखते हुए आंसू
सिमटते हुए सपने
मरते हुए से रिश्ते...

सिखा गए मुझे
नहीं थमना, नहीं रुकना
गिरना, पर गिर के उठना
आगे बढ़ना
और जीना..
सिर्फ ज़िंदा नहीं रहना!


Friday, 5 December 2014

खोलो दरवाज़े...

वो जो दरवाज़े पे दस्तक दे रही है,
शायद तुम्हारे हिस्से की ख़ुशी है,
या है तुम्हारे हिस्से का ग़म,
जो भी है तुम्हारे ही लिए है...
ज़रूरी है,
तुम्हारा उस से मिलना,
वो तोहफा है तुम्हारा,
या सबक हो शायद...
जब तक खोलोगे नहीं दरवाज़े,
दिल और दिमाग के,
होगा जान पाना मुश्किल,
क्यूंकि,
जब आँखें भरी हों ख्वाब से,
और दिल भरा हो प्यार से,
और डर नहीं किसी ख्याल से,
तभी होगा खुद से मिलना,
खुद से जूझना..
और खुद ही से जीत पाना  मुमकिन! 

Friday, 28 November 2014

फुरसत मिलती नहीं अब..

जहाँ से चल के निकल गए हम,
अपनी ही रफ़्तार में बहुत आगे..
उन्ही मोड़ों पे कहीं फुरसत छिपी बैठी थी
नज़र बढ़ी न उस तरफ,
न कदम थमे,
न देखा रुक के..
अपने दिन भी वहां थे और अपनी रात वहीँ बैठी थी!

जो दिल की आवाज़ पे ज़रा ठहरे होते
वही मिल जाती दबी हुई हंसी तुमको
वहीँ पड़ी थी छुप के
मासूमियत भी कहीं
जिसे पाने की तमन्ना लिए चले थे कभी
अपनी ख़ामोशी भी वहीँ..
और अपनी बात वहीँ बैठी थी !!


Monday, 17 November 2014

तेरी याद..


तेरे दिखाए सब ख़्वाब छलकने को जब हुए 
हमने पलकों की नमी जाने संभाली कैसे 
जिस तरफ से तेरी आहट का गुमान हुआ 
सब नज़ारे छोड़ नज़र बस वहीँ डाली ऐसे..  
तेरे जाने से दर-ओ- दीवार यूँ वीरान हुए 
भरी दोपहर लगे रात हो काली जैसे!
मौसम के अंदाज़ बदलने को हैं मगर 
दिल-दिमाग पे छायी बेख्याली ऐसे,
तेरी याद, तेरी बात, तेरा ख़्याल, तेरा साथ..
सर्द हाथों में गर्म चाय की प्याली जैसे! 

Tuesday, 11 November 2014

माँ का लाडला..

प्रिय प्रद्योत और उसकी प्यारी माँ, मेरी प्यारी बहन डॉली के नाम...

आज ही के दिन आया था तेरा लाडला..
तुझे ज़िन्दगी का सबसे हसीं तोहफा देने,
एक अरसा पहले आज ही के दिन आया..
वो तेरी पलकों को नया सपना देनेI
तेरे आँचल में भर दिए उसने,
इन्द्रधनुष के रंग सभी..
तेरे आँगन में भर दिए उसने,
अपने बचपन, जवानी के ढंग सभीI
अब बस महक है बाकी,
उसकी मीठी बातों की..
इन्हें प्यार से संजोये रखना,
ये दौलत है मीठी यादों कीI
तेरे दिल से उसकी जुदाई का,
ये ज़ख्म न भरेगा कभी
पर तुझे फिर किसी रूप में,
खिलखिलाता, वो ज़रूर मिलेगा कहींI

Friday, 31 October 2014

नया सा...

चल फिर उसी राह पर चलें
जहां नयी सुबह आती है
नयी रौशनी छाती है
कुछ नए ख़्वाबों के साये में
फिर नयी खुशबू महकाती है
और नए कोरे कैनवस पर
फिर नए रंग छलकाती है
जहां नयी नवेली पलकों से
नमी दूर हो जाती है
जहां दबे दबे ही सही
पर होंठों पे मुस्कान आती है
वह नया नया सा जहां होगा
पर फिर भी मेरा वहाँ होगा
हर नया दिन हर नया पल
मेरा नया आज, मेरा नया कल! 

Wednesday, 29 October 2014

रात की चादर..


झरोखे हैं बंद, ये खिड़की अधखुली,
कैसे किसी की याद से परदे हिले ज़रा
अंधेरो से दिल लगा लिया, दी रौशनी मिटा
अब शाम के ढलने में आने लगा मज़ा!

चुपचाप सी हैं साँसे, खामोश है ज़ुबां
फिर अपने खयालों पे साया हुआ घना
क्या घर की देहरी पे परछाईं  है कोई
दस्तक की तो आज भी आहट नहीं ज़रा!

ये रात की है चादरऔर चाँद का बिछौना
तकिये पे आंसुओं का है दाग भी पड़ा,
बस आँख बंद करने को मन नहीं मेरा
के  ख्वाब में न उनसे हो जाए सामना!




Sunday, 26 October 2014

छलका सा कल!

कभी ख़ुशी छलक आती है
कभी ग़म छलक आता है
तुम और मैं में, कभी हम छलक आता है!

कभी बीते लम्हें छलक आते है
कभी भुलाया हुआ पल छलक आता है
अक्सर मेरे आज में, मेरा कल छलक आता है!

रुआंसा दिन छलक आता है
जी जलाती रात छलक आती है
खामोशियों के बीच अक्सर बात छलक आती है!

सब साफ़ साफ़ है फिर भी धुंआ सा,
रवानगी में है फिर भी थमा सा,
अक्सर इन आँखों में क्यों तूफ़ान छलक आता है!

ये क्या है, क्यों है, किसके लिए है,
दिल से उठता हुआ बवाल छलक आता है,
आजकल जवाब की तलाश में बस सवाल छलक आता है!

Friday, 3 October 2014

बक्सा..

एक बड़ा सा बक्सा है,
उसमें ढेर सारा सामान है..
कई सारी यादें है
अनगिनत बातें हैं
कुछ पूरे हुए सपनों की
प्यारी सी मुस्कान है..
हाँ, इस बक्से में ढेर सा सामान है!
कुछ सपने अभी बाकी हैं
कई चाहतें अभी बाकी है
इन्हें भी पूरा कर लूँ
मन की ऐसी भी उड़ान है..
हाँ, इस बक्से में ढेर सा सामान है!
कुछ संभाले हुए फूल हैं
कई पीले पड़े से पन्ने
ज़िन्दगी की फेहरिस्त पे
सूखे हुए आंसुओं के निशान हैं..
हाँ, इस बक्से में ढेर सा सामान है!
जब जी चाहता है इसे खोल लेती हूँ
जो गुज़र गए लम्हें उन्हें फिर से जीती हूँ
कुछ धुंधले से पड़ गए जो
मेरे ही लफ्ज़ हैं मेरी ही ज़ुबान है
हाँ, इस बक्से में मेरा ढेर सा सामान है! 

Wednesday, 17 September 2014

तेरी याद में..अजय!

आज बीत गया एक बरस 
आज बीत गए मौसम चार 
आज बदल गया बहुत कुछ 
दिल दिमाग और दुनिया में
कई नए दोस्त मिले
कई पुराने साथ छोड़ गए 
कई दुःख कम हुए
कई जी के जंजाल बढ़ गए 
कई बार रो रो के हलकान हुयी
कई बार हँसते हँसते आंसू निकल आये
कई बार तेरी तस्वीर देखी
कई बार तेरी आवाज़ सुनी,
अब तो गिनती भी भूल गयी
जाने कितनी बार तुझे याद किया
मेरे दिल ने तुझे ढेर सी दुआएं दी
इसी दिल ने तेरा अफ़सोस किया
कैसे मेरा दीवाना दोस्त
बस फ़साना बन के रह गया
हम सब ताकते रह गए
तू खुशबू की तरह हवा के
साथ साथ बह गया 
#MissyouAjju

Sunday, 14 September 2014

आओ ना!

वो जो दूर नज़र आता है, वो है अपना आशियाँ
वहां चमकती है रौशनी, हर पल महकती है हवा..
वहां दर-ओ-दीवार पे बस इतना है लिखा..
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!
कुछ तुम्हारे मस्ती भरे फ़साने हों,
कुछ मेरे मुस्कुराने के बहाने हों..
शिकवे शिकायतों की यहाँ नहीं कोई जगह
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!
चलो हो जाएँ दो चार बातें दिल बहलाने की
हम भी कर लें थोड़ी गपबाजी ज़माने की
न रखो दिल में रंजिश, न होंठों पे गिला..
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!

Friday, 12 September 2014

बंटवारा..आधा अधूरा!

तेरे सामान से कुछ यूँ जुड़ा है मेरा सामान
घर बिखर गया मेरा, क्या खड़ा है तेरा मकान?
आधा पड़ा है यहाँ, आधा वहां उस कोने में
ज़रा सा पा लिया बहुत सा खोने में...
डब्बा यहाँ आ गया ढक्कन वहीँ रह गया
चादर वही रह गयी तकिये का गिलाफ मुझसे कह गया
कप गिलास भी जोड़े में मिलते नहीं आज कल
बर्तन आधे स्टील के है, आधे शायद पीतल
सारे रिश्ते नाते बंट गए दोस्त यार क्या चीज़ हैं
होली दशहरा दिवाली अब त्यौहार क्या चीज़ हैं
क्या बाँट ले इस आस्मां को भी सामान की तरह
चाँद सूरज आया करें अब मेहमान की तरह
न रुकें तेरे पास न टिकें मेरे साथ
सुबह रह जाए तेरी, मेरी अँधेरी रात
सरसराती हवा भी अक्सर बच के निकल जाती  है
यहाँ बहूँ या वहाँ शायद जान नहीं पाती है
अजब कश्मकश में ज़िन्दगी है कट रही
दिल के दो हिस्सों में धड़कन है बंट रही
तू ने अपनी मर्ज़ी तो कर ली पर मुझसे न पूछा
इस हिसाब में सब कुछ बराबर बंटा है क्या?
कुछ रह गया हो बाकी तो आ कर ले उसे भी पूरा
ऐसा न हो कि रह जाए कहीं ये बंटवारा आधा अधूरा!!

खाली खाली..

हर उस गली से गुज़र के देख लिया..
जहां तेरी ख़ुश्बू थी बसी, 
अब अजब खालीपन सा है वहां.. 
कहीं तेरी याद तक नहीं!
मुझे डर था जिस पल का.. 
आज वही घेरे चलता है, 
जहां ताउम्र दरवाज़े बंद न हुए.. 
आज वहां एक खिड़की भी न खुली!! 



Tuesday, 26 August 2014

ठौर ठिकाना!



जहां तक नज़र जाए,
बस कुदरत ही नज़र आये
दिल की आवाज़ हो जैसे,
हवाओं से वो आवाज़ आये
जहां सूरज की रौशनी
दिल महकाए,
जहाँ चाँद-सितारे ही राह दिखाएँ
जब चाहूँ तो भर लूँ...  
मुट्ठी में आसमान
चाहूँ जब बहती हवा के साथ बह जाऊं
जहां दूर तक मिले सुकून की छाँव
बस उसी मंज़िल पे थमे मेरे पाँव
फिर ख़त्म हो बस 
ये रोज़ का आना जाना 
वहीँ मेरा घर हो वहीँ मेरा ठिकाना!

Wednesday, 20 August 2014

कल और कल!

मुड़ के न देख..
बावरे मन 
वो जो सामने है,
उसी का नाम है 
कल.. 
क्या हुआ जो.. 
पीछे छूट गया 
उसका भी नाम है
कल,
नाम पे न जा,
काम पे जा
अगले पड़ाव तक जो है
बस वही है
थामने लायक
पल,
ले देख
संभल,
वो आया
कल!

Tuesday, 19 August 2014

मेरे आंसू...

आंसू,
छलक आते हैं कुछ खो जाने पर
छलक आते हैं मनचाहा मिल जाने पर भी..
आंसू,
छलक आते हैं किसी के जाने के बाद
छलक आते हैं उसके लौट आने के बाद भी ..
आंसू,
छलक आते हैं एक मीठी सी याद पर
छलक आते किसी खटास पर भी..
आंसू,
अलग ही बात है इनकी,
और कितने हैं जो ये दावा का सकें
कि रहेंगे संग मेरे..
आंसू,
हर हाल में साथ निभाते हैं
सिर्फ आँखों का ही नहीं
मेरे दिल का भी...
कई बार सिर्फ,
एक ख्याल से छलक आते हैं
मेरे आंसू !!

Monday, 11 August 2014

तू मेरी कोई नहीं!!

घर की रानी नहीं,
दादी की पोती नहीं,
बाप की बेटी नहीं,
माँ की लाडो नहीं,
दीदी की गुड़िया नहीं,
छोटू की दिद्दी नहीं,
कैसे मैंने सह लिया,
जो उन सबों ने कह दिया,
जा चली जा तू कहीं,
के हम तेरे कुछ भी नहीं!!
उन सभी को छोड़ कर,
थामा था तेरे हाथ को,
सारे रिश्ते तोड़ कर,
जोड़ा था तेरे साथ को,
क्या हुआ जो दिल दुखा..
मरहम सा तेरा प्यार था,
तेरे नाम से खिला हुआ..
मेरा नया संसार था,
पर देख कैसे यह दिन फिरे
फिर आँख से आंसू गिरे
ले..
आज तूने भी कह दिया
जा चली जा तू कहीं,
कि तू मेरी कोई नहीं..
और मैं तेरा कुछ भी नहीं!!

Sunday, 10 August 2014

जा...

चल जा
दूर हो जा 
फिर ना आ
दिल ना दुखा
आस न जगा
कह दिया ना
पास भी न आ
तू ख्वाब है
ख्वाब की तरह...रहना सीख
हक़ीक़त बनने की 
होड़ न लगा!
चल...अब जा...

Monday, 30 June 2014

Don’t give up on me yet!!



So you are difficult to handle and with growing age getting worse!
They say with age comes maturity,
I say with age comes rigidity. 
You tend to get more headstrong
and sometimes in a negative manner,
more stubborn.  
You won’t budge ‘cause you know it all
And once you’ve made your point
you don’t wanna lose ground.
Happens with me a lot too but then
I am not always so pigheaded.. 
And I refuse to give up on you
So you dare not give up on me yet!
Not just yet..

अम्मा की रसोई..

कहाँ गए वो चौके-चूल्हे के घर
 वो धुंए से काले हुए बर्तन..
कहाँ गए वो दाल भात के दिन
वो कोयले की राख से सने बर्तन
अम्मा..

वो तीखी मिर्चें, वो मीठी चटनी,
बस सूखे आलू और पानी  की रोटी,
वो खुशबू तेरे छौंक की 
वो जादू तेरे हाथ का... 
अम्मा..

आज मेरी रसोई चमकदार है..
बर्तनो में कांच की खंकार है,
पर  खाने में वो स्वाद है..
 कामवाली के पकाने में वो प्यार है
अम्मा..

 हवा में तेरी पुकार है
 तेरे बुलावे का इंतज़ार है,
अपनी दुनिया में जी रही हूँ मगर,
मन को आज भी तेरी ही दरकार है 
अम्मा!!




Saturday, 28 June 2014

दो और एक: एक















ज़मीन के नीचे से झांकते ,
ऊपरी दुनिया को टटोलते..
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
कुछ कहना चाहते  हैं 
कुछ सुनना चाहते हैं,
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!! 

कभी भीग जाते हैं भीतर तक,
फिर सूख जाते हैं... 
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!! 
जाने किस तलाश में,
यूंही फिरते इधर उधर 
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
कभी एक दम चुप
कभी फिर से मुखर..
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
कभी सपनो में उलझे,
कभी सपनो से परे.. 
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
ताल मेल अच्छा है,
साथ मिलके रहते हैं,
क्या यही कम हैं.. 
कि आपस मैं बात करते हैं,
एक सी बात करते हैं 
ये मेरे दो नयन हैं,
ये मेरा एक मन है!!