वो जो दरवाज़े पे दस्तक दे रही है,
शायद तुम्हारे हिस्से की ख़ुशी है,
या है तुम्हारे हिस्से का ग़म,
जो भी है तुम्हारे ही लिए है...
ज़रूरी है,
तुम्हारा उस से मिलना,
वो तोहफा है तुम्हारा,
या सबक हो शायद...
जब तक खोलोगे नहीं दरवाज़े,
दिल और दिमाग के,
होगा जान पाना मुश्किल,
क्यूंकि,
जब आँखें भरी हों ख्वाब से,
और दिल भरा हो प्यार से,
और डर नहीं किसी ख्याल से,
तभी होगा खुद से मिलना,
खुद से जूझना..
और खुद ही से जीत पाना मुमकिन!
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