Friday, 28 February 2014

रंगो की उड़ान

तुम्हें पसंद है सिन्दूरी लाल
मुझे, वासंती पीला..
आओ..
एक गुलमोहर एक अमलतास उगाएं!

बाज़ार से ले आयें
कुछ लाल पीली चूड़ियाँ..
फिर तोड़ के उन्हीं टुकड़ों से..
खिलौने का घर बनाएँ!

मैं अपना लहरिया दुपट्टा
ले आती हूँ..
और कुछ नहीं तो
उसे पर्दे की जगह लगाएं!

थोडा उधार लें
पीला रंग तुम्हारे ख्वाब का
कुछ मेरी लाल बिंदिया का
आओ, चलो घर सजाएं!


अम्मा...

फिर तेरा आँचल पकड़ने की ज़िद कहीं इस दिल में है...
क्या कहूं ये दिल मेरा आज किस मुश्किल में है!
आसान नहीं था ये सफ़र अम्मा कभी तेरे बगैर,
आधे-अधूरे बचपन की वोह टीस अब भी दिल में है! 
तू नहीं है पास बस एक खामोश सी तस्वीर है...
आवाज़ तेरी आज भी मौजूद हर महफ़िल में है!
मैंने चाहा यही तेरा साया ही बन जाऊं सदा,
इस तरह तू साथ मेरे, बस मेरे ही दिल में है!!

Sunday, 23 February 2014

Ajju!

तू कुछ इस तरह उठ के चल दिया, 
जैसे कोई मौसम रूठ के चल दिया! 
इस बार फूल खिलने से मना करते हैं.. 
अब कोई बारिश आँगन भिगाती नहीं,
धूप जलाती नहीं और सर्दी ठिठुराती नहीं..
इक तेरी याद है जो दिल से जाती नहीं!
तू कुछ इस तरह उठ के चल दिया, 
जैसे कोई मौसम रूठ के चल दिया! 

Tuesday, 4 February 2014

तुम और मैं...

संक्रांति की पतंग में
बसंत की तरंग में,
होली के रंग में
बैसाख की उमंग में,
मई की उमस में
जून की झुलस में
सावन की फुहार में
भादों की बौछार में,
तीज के झूलों में,
पूजा के फूलों में,
दशहरे की धमक में
दीवाली की चमक में,
जाड़े की रात में
सर्दीगर्मीबरसात में...
कैसा भी मौसम हो कोई भी महीना
साथ रहे सदा, छूटे कभी ना!
तुम और मैं...