Friday, 28 February 2014

अम्मा...

फिर तेरा आँचल पकड़ने की ज़िद कहीं इस दिल में है...
क्या कहूं ये दिल मेरा आज किस मुश्किल में है!
आसान नहीं था ये सफ़र अम्मा कभी तेरे बगैर,
आधे-अधूरे बचपन की वोह टीस अब भी दिल में है! 
तू नहीं है पास बस एक खामोश सी तस्वीर है...
आवाज़ तेरी आज भी मौजूद हर महफ़िल में है!
मैंने चाहा यही तेरा साया ही बन जाऊं सदा,
इस तरह तू साथ मेरे, बस मेरे ही दिल में है!!

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