Wednesday, 17 September 2014

तेरी याद में..अजय!

आज बीत गया एक बरस 
आज बीत गए मौसम चार 
आज बदल गया बहुत कुछ 
दिल दिमाग और दुनिया में
कई नए दोस्त मिले
कई पुराने साथ छोड़ गए 
कई दुःख कम हुए
कई जी के जंजाल बढ़ गए 
कई बार रो रो के हलकान हुयी
कई बार हँसते हँसते आंसू निकल आये
कई बार तेरी तस्वीर देखी
कई बार तेरी आवाज़ सुनी,
अब तो गिनती भी भूल गयी
जाने कितनी बार तुझे याद किया
मेरे दिल ने तुझे ढेर सी दुआएं दी
इसी दिल ने तेरा अफ़सोस किया
कैसे मेरा दीवाना दोस्त
बस फ़साना बन के रह गया
हम सब ताकते रह गए
तू खुशबू की तरह हवा के
साथ साथ बह गया 
#MissyouAjju

Sunday, 14 September 2014

आओ ना!

वो जो दूर नज़र आता है, वो है अपना आशियाँ
वहां चमकती है रौशनी, हर पल महकती है हवा..
वहां दर-ओ-दीवार पे बस इतना है लिखा..
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!
कुछ तुम्हारे मस्ती भरे फ़साने हों,
कुछ मेरे मुस्कुराने के बहाने हों..
शिकवे शिकायतों की यहाँ नहीं कोई जगह
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!
चलो हो जाएँ दो चार बातें दिल बहलाने की
हम भी कर लें थोड़ी गपबाजी ज़माने की
न रखो दिल में रंजिश, न होंठों पे गिला..
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!

Friday, 12 September 2014

बंटवारा..आधा अधूरा!

तेरे सामान से कुछ यूँ जुड़ा है मेरा सामान
घर बिखर गया मेरा, क्या खड़ा है तेरा मकान?
आधा पड़ा है यहाँ, आधा वहां उस कोने में
ज़रा सा पा लिया बहुत सा खोने में...
डब्बा यहाँ आ गया ढक्कन वहीँ रह गया
चादर वही रह गयी तकिये का गिलाफ मुझसे कह गया
कप गिलास भी जोड़े में मिलते नहीं आज कल
बर्तन आधे स्टील के है, आधे शायद पीतल
सारे रिश्ते नाते बंट गए दोस्त यार क्या चीज़ हैं
होली दशहरा दिवाली अब त्यौहार क्या चीज़ हैं
क्या बाँट ले इस आस्मां को भी सामान की तरह
चाँद सूरज आया करें अब मेहमान की तरह
न रुकें तेरे पास न टिकें मेरे साथ
सुबह रह जाए तेरी, मेरी अँधेरी रात
सरसराती हवा भी अक्सर बच के निकल जाती  है
यहाँ बहूँ या वहाँ शायद जान नहीं पाती है
अजब कश्मकश में ज़िन्दगी है कट रही
दिल के दो हिस्सों में धड़कन है बंट रही
तू ने अपनी मर्ज़ी तो कर ली पर मुझसे न पूछा
इस हिसाब में सब कुछ बराबर बंटा है क्या?
कुछ रह गया हो बाकी तो आ कर ले उसे भी पूरा
ऐसा न हो कि रह जाए कहीं ये बंटवारा आधा अधूरा!!

खाली खाली..

हर उस गली से गुज़र के देख लिया..
जहां तेरी ख़ुश्बू थी बसी, 
अब अजब खालीपन सा है वहां.. 
कहीं तेरी याद तक नहीं!
मुझे डर था जिस पल का.. 
आज वही घेरे चलता है, 
जहां ताउम्र दरवाज़े बंद न हुए.. 
आज वहां एक खिड़की भी न खुली!!