Sunday, 14 September 2014

आओ ना!

वो जो दूर नज़र आता है, वो है अपना आशियाँ
वहां चमकती है रौशनी, हर पल महकती है हवा..
वहां दर-ओ-दीवार पे बस इतना है लिखा..
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!
कुछ तुम्हारे मस्ती भरे फ़साने हों,
कुछ मेरे मुस्कुराने के बहाने हों..
शिकवे शिकायतों की यहाँ नहीं कोई जगह
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!
चलो हो जाएँ दो चार बातें दिल बहलाने की
हम भी कर लें थोड़ी गपबाजी ज़माने की
न रखो दिल में रंजिश, न होंठों पे गिला..
आओ तो हंसके आओ, यहाँ रूठना है मना!

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