Friday, 12 September 2014

खाली खाली..

हर उस गली से गुज़र के देख लिया..
जहां तेरी ख़ुश्बू थी बसी, 
अब अजब खालीपन सा है वहां.. 
कहीं तेरी याद तक नहीं!
मुझे डर था जिस पल का.. 
आज वही घेरे चलता है, 
जहां ताउम्र दरवाज़े बंद न हुए.. 
आज वहां एक खिड़की भी न खुली!! 



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