तेरे सामान से कुछ यूँ जुड़ा है मेरा सामान
घर बिखर गया मेरा, क्या खड़ा है तेरा मकान?
आधा पड़ा है यहाँ, आधा वहां उस कोने में
ज़रा सा पा लिया बहुत सा खोने में...
डब्बा यहाँ आ गया ढक्कन वहीँ रह गया
चादर वही रह गयी तकिये का गिलाफ मुझसे कह गया
कप गिलास भी जोड़े में मिलते नहीं आज कल
बर्तन आधे स्टील के है, आधे शायद पीतल
सारे रिश्ते नाते बंट गए दोस्त यार क्या चीज़ हैं
होली दशहरा दिवाली अब त्यौहार क्या चीज़ हैं
क्या बाँट ले इस आस्मां को भी सामान की तरह
चाँद सूरज आया करें अब मेहमान की तरह
न रुकें तेरे पास न टिकें मेरे साथ
सुबह रह जाए तेरी, मेरी अँधेरी रात
सरसराती हवा भी अक्सर बच के निकल जाती है
यहाँ बहूँ या वहाँ शायद जान नहीं पाती है
अजब कश्मकश में ज़िन्दगी है कट रही
दिल के दो हिस्सों में धड़कन है बंट रही
तू ने अपनी मर्ज़ी तो कर ली पर मुझसे न पूछा
इस हिसाब में सब कुछ बराबर बंटा है क्या?
कुछ रह गया हो बाकी तो आ कर ले उसे भी पूरा
ऐसा न हो कि रह जाए कहीं ये बंटवारा आधा अधूरा!!
घर बिखर गया मेरा, क्या खड़ा है तेरा मकान?
आधा पड़ा है यहाँ, आधा वहां उस कोने में
ज़रा सा पा लिया बहुत सा खोने में...
डब्बा यहाँ आ गया ढक्कन वहीँ रह गया
चादर वही रह गयी तकिये का गिलाफ मुझसे कह गया
कप गिलास भी जोड़े में मिलते नहीं आज कल
बर्तन आधे स्टील के है, आधे शायद पीतल
सारे रिश्ते नाते बंट गए दोस्त यार क्या चीज़ हैं
होली दशहरा दिवाली अब त्यौहार क्या चीज़ हैं
क्या बाँट ले इस आस्मां को भी सामान की तरह
चाँद सूरज आया करें अब मेहमान की तरह
न रुकें तेरे पास न टिकें मेरे साथ
सुबह रह जाए तेरी, मेरी अँधेरी रात
सरसराती हवा भी अक्सर बच के निकल जाती है
यहाँ बहूँ या वहाँ शायद जान नहीं पाती है
अजब कश्मकश में ज़िन्दगी है कट रही
दिल के दो हिस्सों में धड़कन है बंट रही
तू ने अपनी मर्ज़ी तो कर ली पर मुझसे न पूछा
इस हिसाब में सब कुछ बराबर बंटा है क्या?
कुछ रह गया हो बाकी तो आ कर ले उसे भी पूरा
ऐसा न हो कि रह जाए कहीं ये बंटवारा आधा अधूरा!!
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