Friday, 28 November 2014

फुरसत मिलती नहीं अब..

जहाँ से चल के निकल गए हम,
अपनी ही रफ़्तार में बहुत आगे..
उन्ही मोड़ों पे कहीं फुरसत छिपी बैठी थी
नज़र बढ़ी न उस तरफ,
न कदम थमे,
न देखा रुक के..
अपने दिन भी वहां थे और अपनी रात वहीँ बैठी थी!

जो दिल की आवाज़ पे ज़रा ठहरे होते
वही मिल जाती दबी हुई हंसी तुमको
वहीँ पड़ी थी छुप के
मासूमियत भी कहीं
जिसे पाने की तमन्ना लिए चले थे कभी
अपनी ख़ामोशी भी वहीँ..
और अपनी बात वहीँ बैठी थी !!


Monday, 17 November 2014

तेरी याद..


तेरे दिखाए सब ख़्वाब छलकने को जब हुए 
हमने पलकों की नमी जाने संभाली कैसे 
जिस तरफ से तेरी आहट का गुमान हुआ 
सब नज़ारे छोड़ नज़र बस वहीँ डाली ऐसे..  
तेरे जाने से दर-ओ- दीवार यूँ वीरान हुए 
भरी दोपहर लगे रात हो काली जैसे!
मौसम के अंदाज़ बदलने को हैं मगर 
दिल-दिमाग पे छायी बेख्याली ऐसे,
तेरी याद, तेरी बात, तेरा ख़्याल, तेरा साथ..
सर्द हाथों में गर्म चाय की प्याली जैसे! 

Tuesday, 11 November 2014

माँ का लाडला..

प्रिय प्रद्योत और उसकी प्यारी माँ, मेरी प्यारी बहन डॉली के नाम...

आज ही के दिन आया था तेरा लाडला..
तुझे ज़िन्दगी का सबसे हसीं तोहफा देने,
एक अरसा पहले आज ही के दिन आया..
वो तेरी पलकों को नया सपना देनेI
तेरे आँचल में भर दिए उसने,
इन्द्रधनुष के रंग सभी..
तेरे आँगन में भर दिए उसने,
अपने बचपन, जवानी के ढंग सभीI
अब बस महक है बाकी,
उसकी मीठी बातों की..
इन्हें प्यार से संजोये रखना,
ये दौलत है मीठी यादों कीI
तेरे दिल से उसकी जुदाई का,
ये ज़ख्म न भरेगा कभी
पर तुझे फिर किसी रूप में,
खिलखिलाता, वो ज़रूर मिलेगा कहींI