Monday, 17 November 2014

तेरी याद..


तेरे दिखाए सब ख़्वाब छलकने को जब हुए 
हमने पलकों की नमी जाने संभाली कैसे 
जिस तरफ से तेरी आहट का गुमान हुआ 
सब नज़ारे छोड़ नज़र बस वहीँ डाली ऐसे..  
तेरे जाने से दर-ओ- दीवार यूँ वीरान हुए 
भरी दोपहर लगे रात हो काली जैसे!
मौसम के अंदाज़ बदलने को हैं मगर 
दिल-दिमाग पे छायी बेख्याली ऐसे,
तेरी याद, तेरी बात, तेरा ख़्याल, तेरा साथ..
सर्द हाथों में गर्म चाय की प्याली जैसे! 

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