Tuesday, 26 August 2014

ठौर ठिकाना!



जहां तक नज़र जाए,
बस कुदरत ही नज़र आये
दिल की आवाज़ हो जैसे,
हवाओं से वो आवाज़ आये
जहां सूरज की रौशनी
दिल महकाए,
जहाँ चाँद-सितारे ही राह दिखाएँ
जब चाहूँ तो भर लूँ...  
मुट्ठी में आसमान
चाहूँ जब बहती हवा के साथ बह जाऊं
जहां दूर तक मिले सुकून की छाँव
बस उसी मंज़िल पे थमे मेरे पाँव
फिर ख़त्म हो बस 
ये रोज़ का आना जाना 
वहीँ मेरा घर हो वहीँ मेरा ठिकाना!

Wednesday, 20 August 2014

कल और कल!

मुड़ के न देख..
बावरे मन 
वो जो सामने है,
उसी का नाम है 
कल.. 
क्या हुआ जो.. 
पीछे छूट गया 
उसका भी नाम है
कल,
नाम पे न जा,
काम पे जा
अगले पड़ाव तक जो है
बस वही है
थामने लायक
पल,
ले देख
संभल,
वो आया
कल!

Tuesday, 19 August 2014

मेरे आंसू...

आंसू,
छलक आते हैं कुछ खो जाने पर
छलक आते हैं मनचाहा मिल जाने पर भी..
आंसू,
छलक आते हैं किसी के जाने के बाद
छलक आते हैं उसके लौट आने के बाद भी ..
आंसू,
छलक आते हैं एक मीठी सी याद पर
छलक आते किसी खटास पर भी..
आंसू,
अलग ही बात है इनकी,
और कितने हैं जो ये दावा का सकें
कि रहेंगे संग मेरे..
आंसू,
हर हाल में साथ निभाते हैं
सिर्फ आँखों का ही नहीं
मेरे दिल का भी...
कई बार सिर्फ,
एक ख्याल से छलक आते हैं
मेरे आंसू !!

Monday, 11 August 2014

तू मेरी कोई नहीं!!

घर की रानी नहीं,
दादी की पोती नहीं,
बाप की बेटी नहीं,
माँ की लाडो नहीं,
दीदी की गुड़िया नहीं,
छोटू की दिद्दी नहीं,
कैसे मैंने सह लिया,
जो उन सबों ने कह दिया,
जा चली जा तू कहीं,
के हम तेरे कुछ भी नहीं!!
उन सभी को छोड़ कर,
थामा था तेरे हाथ को,
सारे रिश्ते तोड़ कर,
जोड़ा था तेरे साथ को,
क्या हुआ जो दिल दुखा..
मरहम सा तेरा प्यार था,
तेरे नाम से खिला हुआ..
मेरा नया संसार था,
पर देख कैसे यह दिन फिरे
फिर आँख से आंसू गिरे
ले..
आज तूने भी कह दिया
जा चली जा तू कहीं,
कि तू मेरी कोई नहीं..
और मैं तेरा कुछ भी नहीं!!

Sunday, 10 August 2014

जा...

चल जा
दूर हो जा 
फिर ना आ
दिल ना दुखा
आस न जगा
कह दिया ना
पास भी न आ
तू ख्वाब है
ख्वाब की तरह...रहना सीख
हक़ीक़त बनने की 
होड़ न लगा!
चल...अब जा...