Monday, 11 August 2014

तू मेरी कोई नहीं!!

घर की रानी नहीं,
दादी की पोती नहीं,
बाप की बेटी नहीं,
माँ की लाडो नहीं,
दीदी की गुड़िया नहीं,
छोटू की दिद्दी नहीं,
कैसे मैंने सह लिया,
जो उन सबों ने कह दिया,
जा चली जा तू कहीं,
के हम तेरे कुछ भी नहीं!!
उन सभी को छोड़ कर,
थामा था तेरे हाथ को,
सारे रिश्ते तोड़ कर,
जोड़ा था तेरे साथ को,
क्या हुआ जो दिल दुखा..
मरहम सा तेरा प्यार था,
तेरे नाम से खिला हुआ..
मेरा नया संसार था,
पर देख कैसे यह दिन फिरे
फिर आँख से आंसू गिरे
ले..
आज तूने भी कह दिया
जा चली जा तू कहीं,
कि तू मेरी कोई नहीं..
और मैं तेरा कुछ भी नहीं!!

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