जहां तक नज़र जाए,
बस कुदरत ही नज़र आये
दिल की आवाज़ हो जैसे,
हवाओं से वो आवाज़ आये
जहां सूरज की रौशनी
दिल महकाए,
जहाँ चाँद-सितारे ही राह दिखाएँ
जब चाहूँ तो भर लूँ...
जहाँ चाँद-सितारे ही राह दिखाएँ
जब चाहूँ तो भर लूँ...
मुट्ठी में आसमान
चाहूँ जब बहती हवा के साथ बह जाऊं
जहां दूर तक मिले सुकून की छाँव
बस उसी मंज़िल पे थमे मेरे पाँव
फिर ख़त्म हो बस
चाहूँ जब बहती हवा के साथ बह जाऊं
जहां दूर तक मिले सुकून की छाँव
बस उसी मंज़िल पे थमे मेरे पाँव
फिर ख़त्म हो बस
ये रोज़ का आना जाना

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