Ajju!
तू कुछ इस तरह उठ के चल दिया,
जैसे कोई मौसम रूठ के चल दिया!
इस बार फूल खिलने से मना करते हैं..
अब कोई बारिश आँगन भिगाती नहीं,
धूप जलाती नहीं और सर्दी ठिठुराती नहीं..
इक तेरी याद है जो दिल से जाती नहीं!
तू कुछ इस तरह उठ के चल दिया,
जैसे कोई मौसम रूठ के चल दिया!
No comments:
Post a Comment