Tuesday, 4 February 2014

तुम और मैं...

संक्रांति की पतंग में
बसंत की तरंग में,
होली के रंग में
बैसाख की उमंग में,
मई की उमस में
जून की झुलस में
सावन की फुहार में
भादों की बौछार में,
तीज के झूलों में,
पूजा के फूलों में,
दशहरे की धमक में
दीवाली की चमक में,
जाड़े की रात में
सर्दीगर्मीबरसात में...
कैसा भी मौसम हो कोई भी महीना
साथ रहे सदा, छूटे कभी ना!
तुम और मैं...

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