Friday, 3 October 2014

बक्सा..

एक बड़ा सा बक्सा है,
उसमें ढेर सारा सामान है..
कई सारी यादें है
अनगिनत बातें हैं
कुछ पूरे हुए सपनों की
प्यारी सी मुस्कान है..
हाँ, इस बक्से में ढेर सा सामान है!
कुछ सपने अभी बाकी हैं
कई चाहतें अभी बाकी है
इन्हें भी पूरा कर लूँ
मन की ऐसी भी उड़ान है..
हाँ, इस बक्से में ढेर सा सामान है!
कुछ संभाले हुए फूल हैं
कई पीले पड़े से पन्ने
ज़िन्दगी की फेहरिस्त पे
सूखे हुए आंसुओं के निशान हैं..
हाँ, इस बक्से में ढेर सा सामान है!
जब जी चाहता है इसे खोल लेती हूँ
जो गुज़र गए लम्हें उन्हें फिर से जीती हूँ
कुछ धुंधले से पड़ गए जो
मेरे ही लफ्ज़ हैं मेरी ही ज़ुबान है
हाँ, इस बक्से में मेरा ढेर सा सामान है! 

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