Friday, 31 October 2014

नया सा...

चल फिर उसी राह पर चलें
जहां नयी सुबह आती है
नयी रौशनी छाती है
कुछ नए ख़्वाबों के साये में
फिर नयी खुशबू महकाती है
और नए कोरे कैनवस पर
फिर नए रंग छलकाती है
जहां नयी नवेली पलकों से
नमी दूर हो जाती है
जहां दबे दबे ही सही
पर होंठों पे मुस्कान आती है
वह नया नया सा जहां होगा
पर फिर भी मेरा वहाँ होगा
हर नया दिन हर नया पल
मेरा नया आज, मेरा नया कल! 

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