Saturday, 28 June 2014

दो और एक: एक















ज़मीन के नीचे से झांकते ,
ऊपरी दुनिया को टटोलते..
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
कुछ कहना चाहते  हैं 
कुछ सुनना चाहते हैं,
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!! 

कभी भीग जाते हैं भीतर तक,
फिर सूख जाते हैं... 
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!! 
जाने किस तलाश में,
यूंही फिरते इधर उधर 
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
कभी एक दम चुप
कभी फिर से मुखर..
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
कभी सपनो में उलझे,
कभी सपनो से परे.. 
वही दो नयन हैं,
वही एक मन है!!
ताल मेल अच्छा है,
साथ मिलके रहते हैं,
क्या यही कम हैं.. 
कि आपस मैं बात करते हैं,
एक सी बात करते हैं 
ये मेरे दो नयन हैं,
ये मेरा एक मन है!!







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