Wednesday, 2 April 2014

सफ़र बाकी है..




बस की खुली खिड़की से आती तेज़ हवा,
बाहर गिरती बारिश,
और आँखों के कोनो पे ठहरी,
नमकीन पानी की बूँदें..
खामोश ज़ुबाँ, दिल में तूफ़ान,
होंठों पे कहीं दबी सी मुस्कान,
ज़िन्दगी बाकी है अभी,
अब भी मेरा रस्ता तकती है!

बादल की गरज को गौर से सुनो
इस में आवाज़ें हैं कई,
बिजली की कौंध को फिर देखो
इस में शक्लें हैं कई,
सड़क के गड्ढे ही मत गिनो,
आस पास के नज़ारे भी हैं
ज़रा दिल से काम लो,
कि सफ़र बाकी है अभी!!

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