तमाम रात रो रो के गुज़ारी ऐसे
आस्माँ से बर्फ़ के फ़ाहे गिरे हों जैसे
दिल छला भी जला भी दुखा भी
फिर तेरी याद ने मरहम का सा काम किया
कुछ टूटा छन्न से फिर जुड़ भी गया
तेरा ख़याल वो दरख़्तों की छांव सा
जहाँ बैठ पनाह ली,
तेरा नाम लिया
मेरी जीत मेरी हार के तमाम क़िस्से
और वो कहानी जिस में रात घुल जाए
पर अब मन में आता है
के एक सार हो के जी लूँ मैं
बस अब ख़ुद की ही हो लूँ मैं
और रहे तसल्ली यही दिल को
के कितनी भी हो बर्फ़ जमी
ये धूप का टुकड़ा मेरा है,
ये धूप का टुकड़ा
मेरा है !!
आस्माँ से बर्फ़ के फ़ाहे गिरे हों जैसे
दिल छला भी जला भी दुखा भी
फिर तेरी याद ने मरहम का सा काम किया
कुछ टूटा छन्न से फिर जुड़ भी गया
तेरा ख़याल वो दरख़्तों की छांव सा
जहाँ बैठ पनाह ली,
तेरा नाम लिया
मेरी जीत मेरी हार के तमाम क़िस्से
और वो कहानी जिस में रात घुल जाए
पर अब मन में आता है
के एक सार हो के जी लूँ मैं
बस अब ख़ुद की ही हो लूँ मैं
और रहे तसल्ली यही दिल को
के कितनी भी हो बर्फ़ जमी
ये धूप का टुकड़ा मेरा है,
ये धूप का टुकड़ा
मेरा है !!
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