मुझे अब तुम्हारी आवाज़
सुनाई नहीं देती..
तस्वीर सामने है फिर भी
दिखाई नहीं देती।
अब तुम्हारे क़दमों की आहट का
गुमां सा भी नहीं होता,
ना तुम्हारी कमी से
आँखें नम होती हैं ..
कई दिन से यही ख़याल
आ रहा है मुझे
शायद कुछ इसी तरह रूह से
मुहब्बत ख़त्म होती है !
सुनाई नहीं देती..
तस्वीर सामने है फिर भी
दिखाई नहीं देती।
अब तुम्हारे क़दमों की आहट का
गुमां सा भी नहीं होता,
ना तुम्हारी कमी से
आँखें नम होती हैं ..
कई दिन से यही ख़याल
आ रहा है मुझे
शायद कुछ इसी तरह रूह से
मुहब्बत ख़त्म होती है !
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