Wednesday, 18 December 2013

आज और कल भी...

जो बीत गयी वो रात गयी,
अच्छी हो बुरी, हर बात गयी,
जो सामने है कर उसका यकीन,
फिर देख है कितनी सुबह हसीन!!

वो शाम काली थी भी तो क्या
आज फिर सुबह में रंग हैं..
कल साज़ खामोश भले ही हो,
आज फिर नयी तरंग है...

मेरे ख्वाब पूरे हो या न हो,
मेरी नींद मुझसे रूठे नहीं
मुझे ऐतबार यही रहे
तेरा हाथ मुझसे छूटे नहीं!!

मेरी ज़िन्दगी चार पल सही..
मेरा प्यार ज़िन्दगी के बाद भी,
यह ख्याल फिर मंज़ूर है
के तू साथ है मेरे बाद भी!!

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