Tuesday, 13 September 2016

करना पड़ता है!

तुम सुनी-सुनाई बात पे
गौर न करना
लोग बस यूँ ही कभी
कुछ भी कहा करते हैं
तुम तो पढ़ लेना
मेरी हाथ की रेखाओं को
जान लेना की
तितलियों की तरह
सीख लिया है हर मौसम में
रंग भरना मैंने..
और सीखा है
जुगनुओं की तरह
हर अँधेरे को रोशन करना मैंने !
करना पड़ता है ये सब
अपने लिए
अपनों के लिए
और अपने ही सपनो के लिए
करना पड़ता है!


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