Monday, 9 January 2017

ठंडी चाय

रोज़ किसी कोने में पड़ी 
अपनी किस्मत को रो रही होती है.. 
मेरी सुबह की चाय अक्सर 
ठंडी हो रही होती है!

अजब भगदड़ मची रहती है 
बच्चों का स्कूल - कॉलेज, 
अपने भी काम की जल्दी 
कभी ये उठा कभी उसे रख 
किसी तरह सब निपट जाए और 
समय रहते घर से निकल लूँ 
बस इसी फ़िराक में मेरी नींद उड़ी होती है !
सुबह की चाय अक्सर...

टिफ़िन, पानी, दुपट्टा और पर्स, 
दिन भर की ज़रुरत लायक छुट्टे पैसे 
इतना भी समेट लूँ तो बहुत है 
ये टाइम भी काट लूँ,
बस आज भर और निकाल दूं 
इसी सोच में 
कहीं मेरी तसल्ली पड़ी होती है 
सुबह की चाय अक्सर...

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