Sunday, 2 March 2014

आओ, चलें..

कुछ अनसुने से किस्से हैं, 
कई अनकही सी बातें हैं.. 
वक़्त की रफ़्तार भला थमी है कहीं, 
अभी सुबह हुई.. अब रातें हैं!
वो सभी जो आगे निकल गए मुझ से, 
आज भी दिल में समाते हैं 
ज़िन्दगी कोई मौसम हो जैसे, 
इस तरह लोग आते जाते हैं!!
कई भटके हुए से ख्वाब न मिल जाए कहीं, 
हम इस लिए नींद से कतराते हैं..
फिर किसी हसीं सफ़र की शुरुआत करें
ऐसे ख्याल फिर हौसला बढ़ाते हैं!!




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