कुछ ख्वाब सजीले हैं
कुछ रंग रंगीले हैं
कई जो पूरे हो न सके
उनकी वजह से मेरे
तकिये आज भी गीले हैं!
पलकों पे छुपा रखे हैं
कई पल हैं, कुछ आज,
कुछ मेरे कल हैं,
सूखे नहीं अभी तक
ये अब भी सीले सीले हैं!
सीप में क़ैद मोती की तरह,
सतह में गुम हैं,
पहली नज़र में दिखते नहीं
कुछ ऐसे गुमसुम हैं,
पानी में हैं इसीलिए..आज भी पनीले हैं!
रौशनी कम सी होती जा रही,
नज़र में जाल सा लगने लगा है
उम्र की रफ़्तार कुछ यूँ
बढ़ने लगी के, जीना
जंजाल सा लगने लगा है
बस, के रुक जाएँ अब क़दम यूँ ही
बस, के थम जाएँ साँसों की रवानी,
बस, के टूटती इन हसरतों में
बस के रह जाए मेरी ज़िंदगानी..
बस, अब बस!!
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